Friday, October 23, 2009

'मेरी बेटी का कत्ल हुआ, जज Cyriac Joseph पर केस चलाने दो'

सिस्टर अभया के पिता ने राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल और चीफ जस्टिस को चिट्ठी लिखकर सुप्रीम कोर्ट के एक जज Cyriac Joseph के खिलाफ जांच की मांग की है। सिस्टर अभया 17 साल पहले कोट्टायम के एक कॉन्वेंट में मृत पाई गई थीं। उनके पिता का आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट के सिरियाक जोसफ (Cyriac Joseph) ने इस केस को प्रभावित करने की कोशिश की है।

अभया के पिता ए. थॉमस ने अपने खत में लिखा है कि या तो जोसफ (Cyriac Joseph) के खिलाफ जांच की जाए या मुझे जज पर आईपीसी की धाराओं का उल्लंघन करने का केस चलाने की मंजूरी दी जाए। यह जानकारी उनके वकील ए. एक्स. वर्गीज ने दी। वर्गीज ने बताया कि मई 2008 में जोसफ (Cyriac Joseph) बेंगलुरु की उस लैब में गए थे जहां अभया मर्डर केस के तीन आरोपियों का नारको टेस्ट कराया जा रहा था। इस समय मामला अदालत में था और सीबीआई केस की जांच कर रही थी। इसके अलावा मर्डर के अगले दिन भी जोसफ (Cyriac Joseph) कॉन्वेंट गए थे उस समय वह अडिशनल एडवोकेट जनरल थे। वर्गीज के मुताबिक, इससे पता चलता है कि जज जोसफ (Cyriac Joseph) इसे दबाने की साजिश में शामिल हैं। इसकी जांच होनी चाहिए।

गौरतलब है कि सिस्टर अभया का शव 27 मार्च 1992 को कोट्टायम कॉन्वेंट में एक कुएं के भीतर पाया गया था। सीबीआई ने इस सिलसिले में 19 नवंबर 2008 को तीन लोगों को अरेस्ट किया था। हालांकि बाद में इन्हें 1 जनवरी को बेल मिल गई थी। सीबीआई ने केरल हाई कोर्ट को बताया कि जोसफ ने नारको टेस्ट की सीडी की जांच की थी और उसे सही बताया था। दूसरी तरफ, अभया के पिता का कहना है कि यह सीडी ऑरिजनल नहीं है।

Thursday, October 15, 2009

भारत ने फिर चीन को फटकारा, बांध न बनाने को कहा

भारत ने चीन के खिलाफ एक और मोर्चा खोलते हुए कहा कि वह चीन द्वारा ब्रह्मपुत्र नदी पर बड़े बांध के निर्माण के खिलाफ है और इस खबर की जांच कर रहा है कि इंकार किये जाने के बावजूद क्या चीन इस चोरी चुपके से इस परियोजना पर कार्य कर रहा है।

चीन की ओर से नदी पर बांध का निर्माण शुरू किए जाने की मीडिया में आई खबरों पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि पिछले तीन साल में बैठकों के दौरान भारत ने ऐसी परियोजनाओं से नीचे की ओर बहाव में रहने वाले लोगों के सामाजिक-आर्थिक जीवन पर व्यापक प्रभाव पड़ने की बात कही गई।

साल 2006 के बाद से इस मुद्दे पर विशेषज्ञ स्तर की तीन बैठकों में उल्लेख की बात करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विष्णु प्रकाश ने कहा भारतीय पक्ष ने चीनी पक्ष की ओर से ब्रह्मपुत्र नदी का रुख मोड़ने की परियोजना या बड़ा बांध बनाने की खबरों से जुड़ा मुद्दा उठाया है। भारतीय पक्ष ने चीन की ओर से ऐसी कोई गतिविधि न शुरू किए जाने की उम्मीद जताई जिससे नदी जल के रूख में परिवर्तन होता हो और नीचे की ओर बहाव के क्षेत्र में आर्थिक-सामाजिक जीवन प्रभावित हो।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ने इससे पहले भी ऐसे किसी बांध के निर्माण पर आपत्ति जताई थी और चीन ने ऐसी किसी योजना के बारे में सिरे से इंकार किया था।

उनकी यह टिप्पणी मीडिया में आई उन खबरों के बाद आई है कि चीन ने नागमू पनबिजली परियोजना के हिस्से के तौर पर नदी पर बांध बनाने का काम शुरू कर दिया है। नागमू पनबिजली परियोजना की शुरुआत 16 मार्च को हुई थी।

Monday, October 12, 2009

हत्यारे नक्सलियों ने रेलवे स्टेशन फूंका, ब्लॉक ऑफिस उड़ाया

बिहार के लखीसराय जिले के बंशीपुर रेलवे स्टेशन पर सोमवार देर रात हत्यारे नक्सलियों ने धावा बोलकर तोड़फोड़ की और वहां रखे कागजातों को आग के हवाले कर दिया। दूसरी ओर मंगलवार तड़के नक्सलियों ने मुंगेर जिले के संग्रामपुर ब्लॉक ऑफिस के भवन को विस्फोटक लगाकर उड़ा दिया।

पुलिस के अनुसार हत्यारे नक्सलियों ने मंगलवार तड़के करीब 3 बजे संग्रामपुर ब्लॉक ऑफिस पर आ धमके और विस्फोटक लगाकर कार्यालय भवन को उड़ा दिए।

संग्रामपुर थाना के प्रभारी किशोर कुमार ने बताया कि इस घटना में प्रखंड कार्यालय का भवन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। साथ ही यहां रखे फर्नीचर और कागजातों को भी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने बताया कि घटना को अंजाम देने के बाद नक्सली फरार हो गए।

इससे पहले आतंकवादी नक्सली भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के करीब 40-50 नक्सली रात के करीब 12 बजे रेलवे स्टेशन पर हमला कर सहायक स्टेशन मास्टर (एएसएम) ए. के. गौड़ सहित स्टेशन पर तैनात कर्मचारियों को बंधक बना लिया।

आतंकवादी नक्सलियों ने स्टेशन के कंट्रोल पैनल सहित सभी कागजातों को क्षतिग्रस्त कर दिया। घटना को अंजाम देने के बाद जाते वक्त सभी कागजातों में आग लगा दी।

राजकीय रेल पुलिस, जमालपुर के एसपी विमल कुमार ने मंगलवार को बताया कि घटना के बाद किउल-झाझा रेलखंड पर ट्रैफिक ठप हो गया था, जिसे सुबह आरंभ कर दिया गया। उन्होंने कहा कि आतंकवादी नक्सलियों के खिलाफ छापामारी अभियान तेज कर दिया गया है। साथ ही पूरे मामले की जांच प्रारंभ कर दी गई है।

गौरतलब है कि सीपीआई(माओवादी) ने बिहार और झारखंड में बीते सोमवार से 2 दिवसीय बंद का ऐलान कर रखा है।

झारखंड में हत्यारे माओवादियों का तांडव

बिहार और झारखंड में माओवादियों ने दो दिनों के बंद के शुरू होते ही तांडव मचाना शुरू कर दिया है। बोकारो में माओवादियों ने रेलवे
ट्रैक और गिरीडीह में एक पुल को उड़ा दिया है। इसके अलावा नक्सलियों ने कई ट्रकों को भी आग के हवाले कर दिया है। माओवादियों के बंद को देखते हुए दोनों राज्यों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। कार्रवाई के लिए हवाई सर्वे करके माओवादियों के ठिकानों का पता लगाया जा रहा है।

दो दिनों के इस बंद का आयोजन सीपीआई (माओवादी)ने उनके कथित आंदोलन को सुरक्षा बलों के जरिए काबू में करने की कोशिशों के विरोध में किया है।

माओवादियों ने तड़के बोकारो के निकट झरनडीह में रेलवे ट्रैक को उड़ा दिया। धनबाद डिवीजन के जनसंपर्क अधिकारी अरिंदम दास ने बताया कि विस्फोट करीब ढाई बजे हुआ रेल ट्रैक क्षतिग्रस्त होने से धनबाद डिवीजन की इस लाइन पर शक्तिपुंज एक्सप्रेस जैसी कुछ ट्रेनों के प्रभावित होने की खबर है।
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गिरीडीह के एसपी रविकांत धान ने बताया कि डुमरी में करीब नक्सलियों तीन ट्रकों को आग के हवाले कर दिया और धमाके भी किए। इससे पहले रात को जीटी रोड पर लेधाटांड़ के पास एक बस पर फायरिंग की। नक्सलियों ने बंद के दौरान बस नहीं चलाने की चेतावनी भी दी। देर रात तक सैकड़ों की संख्या में नक्सलियों ने जीटी रोड को कब्जे में कर रखा था। माओवादियों ने डुमरी-गिरीडीह रोड पर ट्रैफिक को रोकने के लिए पेड़ों को काट कर रास्ते पर रख दिया।

उन्होंने बताया कि माओवादियों ने डुमरी को जीटी रोड से जोड़ने वाले रास्ते पर पड़ने वाले एक पुल को भी विस्फोटकों से आंशिक तौर पर नुकसान पहुंचाया। धान ने बताया कि इलाके में गोलीबारी की आवाजें भी सुनाई दीं।

Saturday, October 10, 2009

एनजीओ के जरिए विदेशी पैसा पा रहे हैं नक्सली

पश्चिम बंगाल पुलिस के एक शीर्ष अधिकारी ने शुक्रवार को कहा है कि कुछ गैर सरकारी संगठनों के जरिए नक्सलियों के पास विदेशों से आर्थिक मदद पहुंच रही है।

राज्य के पुलिस महानिदेशक भूपिंदर सिंह ने मीडियाकर्मियों को बताया कि कुछ गैर सरकारी संगठनों द्वारा जनजातियों के कल्याण के नाम पर लिए जा रहे विदेशी धन का कुछ हिस्सा नक्सलियों के पास पहुंच रहा है।

भूपिंदर सिंह ने कहा है कि भूमि उच्छेद प्रतिरोध समिति (बीयूपीसी) के साथ नक्सलियों के संबंध हैं। तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस जैसी कुछ पार्टियां बीयूपीसी का हिस्सा हैं।

नंदीग्राम में तृणमूल कांग्रेस के नेता और सोनाचुरा ग्राम पंचायत प्रमुख निशिकांत मंडल की हाल में हुई हत्या के बारे में पूछे जाने पर सिंह ने कहा कि यह अपवित्र गठजोड़ के पतन का एक परिणाम था।

दम तोड़ते रहे पुलिसवाले, नहीं आया हेलिकॉप्टर

महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में हत्यारे माओवादियों के हमले के बाद खून से लहूलुहान और मदद के लिए तड़पते पुलिसकर्मी। वे वॉकी-टॉकी से अपने अधिकारियों को एक हेलिकॉप्टर भेजने की मिन्नत कर रहे थे। लेकिन हेलिकॉप्टर चंद किलोमीटर दूर होने के बाद भी नहीं पहुंचा। क्योंकि हेलिकॉप्टर चुनावी रैली में आए कांग्रेसी नेताजी की सेवा में था।

गढ़चिरौली में 300 हत्यारे माओवादियों ने 40 पुलिसकर्मियों के दल पर हमला बोल दिया था। इससे ठीक 24 घंटे पहले कांग्रेस के उम्मीदवार धर्मराव बाबा आत्राम चुनावी रैली के लिए वहां हेलिकॉप्टर से आए। इस हमले में 17 पुलिसकर्मी शहीद हो गए। बाकी जो बचे वह अपने घायल साथियों के लिए अधिकारियों से वॉकी-टॉकी से मदद की गुहार लगाते रहे। उन्हें भरोसा दिलाया गया कि उनके घायल साथियों की मदद के लिए हेलिकॉप्टर भेजा जा रहा है। लेकिन पांच घंटे गुजर गए, हेलिकॉप्टर नहीं आया।

इस हमले में बचे जवानों की जुबान पर बस एक ही सवाल है। आखिर वह हेलिकॉप्टर क्यों नहीं आया? कुछ जवान नाम न छापने की बात पर कहते हैं अगर हेलिकॉप्टर से मदद मिल जाती,तो उनके इतने साथी जान न गंवाते। यदि हेलिकॉप्टर वहां से गुजरता भी तो हत्यारे माओवादी उससे ही डर जाते। बिना किसी मदद के हम अपने साथियों को दम तोड़ते देखते रहे।

DGP (इलेक्शन) अनामी राय ने नागपुर में कुछ दिन पहले कहा था कि गढ़चिरौली में 4 हेलिकॉप्टर तैनाती के लिए तैयार हैं। लेकिन अभी तक वहां एक भी हेलिकॉप्टर नहीं है। 17 शहीद पुलिसकर्मियों का जब अंतिम संस्कार हो रहा था, तो वहां हेलिकॉप्टर से पहुंचे गृह मंत्री जयंत पाटिल को देखकर जवानों के घाव हरे हो रहे थे।

अपने रिश्तेदार सुरेश को इस हमले में खो देने वाले रमेश दुर्गे ने कहा, 'सरकार को नेताओं को हेलिकॉप्टर देने में कोई परेशानी नहीं है। लेकिन जब गढ़चिरौली मे जवानों की जान बचाने के लिए हेलिकॉप्टर भेजने की बात आई तो दिक्कत आ गई। क्या हमारी जान की कोई कीमत नहीं है।?

Tuesday, October 6, 2009

हत्यारे माओवादियों ने अगवा इंस्पेक्टर का सिर काटा

हत्यारे माओवादियों ने अगवा किए गए पुलिस इंस्पेक्टर फ्रांसिस इंदवार की गला काट कर हत्या कर दी है। फ्रांसिस को हफ्ताभर पहले अगवा कर लिया गया था। उनके बदले तीन नक्सली नेताओं की रिहाई की मांग की जा रही थी। इन नेताओं में कोबाड़ घांदी का नाम भी शामिल है।

इस बहादुर इंस्पेक्टर के परिवार ने भी सरकार से कह दिया था कि फ्रांसिस के बदले किसी को न छोड़ा जाए।

रांची के एसपी (रूरल) हेमंत टोपो ने बताया कि राज्य पुलिस की खुफिया ब्रांच में काम कर रहे 37 वर्षीय इंदवार का शव उनके कटे हुए सिर के साथ यहां से करीब 12 किलोमीटर दूर नामकोम पुलिस स्टेशन के तहत राइशा घाटी के पास बरामद किया गया।

हत्यारे माओवादियों ने 30 सितंबर को यहां से करीब 70 किलोमीटर दूर खूंटी जिले के हेमब्रोम बाजार से इंदवार का अपहरण कर लिया था। उनके परिवार में पत्नी और तीन बच्चे हैं।

खबरों के मुताबिक माओवादियों ने अधिकारी को छोड़ने के बदले तीन नक्सली नेताओं घांदी, छत्रधर महतो और भूषण यादव की रिहाई की मांग की थी।

संगठन के दक्षिण छोटानागपुर समिति के सचिव समरजी ने शनिवार को एक लोकल अखबार को फोन कर अधिकारियों तक अपनी मांग पहुंचाई थी।