Tuesday, November 10, 2009

अब जनसत्ता भी प्रगति की राह में,

खुशियां, आज के जनसत्ता का मुखपृष्ठ इसके खुशहाली की राह पर चल पड़ने का संकेत दे रहा है।

Monday, November 9, 2009

मस्जिद के सामने मुसलमानों ने गाया राष्ट्रगीत

देवबंद के फतवे को धता बताते हुए बैतूल बाजार की जामा मस्जिद के इमाम हाफिज अब्दुल राजिक की अगुआई में मुसलमान समुदाय के एक समूह ने मस्जिद के सामने राष्ट्रगीत गाया। बैतूल बाजार की जामा मस्जिद के इमाम हाफिज अब्दुल राजिक के न्यौते पर इस सामूहिक गान को देखने के लिए मस्जिद के सामने विभिन्न संप्रदाय के कई लोग जमा हुए।

इस समारोह का आयोजन रुक्मणि बालाजी मंदिर की ओर से किया गया। पहले एक मंदिर के सामने राष्ट्रगीत गाकर भारत माता नाम से रैली निकाली गई। जब यह रैली मस्जिद के सामने पहुंची तो इमाम ने लोगों से वंदेमातरम गानी की अपील की। इसमें अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों ने हिस्सा लिया।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने वंदेमातरम न गाने के लिए जारी किए गए फतवे को ही आड़े हाथ लिया है। बोर्ड के सदस्य मौलाना हमीदुल हसन ने कहा कि अगर मुसलमान राष्ट्रगीत वंदेमातरम गाते हैं तो इसमें कोई बुराई नहीं है।

Wednesday, October 28, 2009

अभी नक्सलियों का खतरनाक रूप सामने आना बाकी

अंदरुनी मोर्चे पर लगातार सरकार को चुनौती दे रहे नक्सलवादियों के तार विदेशी संगठनों से भी जुड़े हुए हैं। लिट्टे के साथ-साथ उत्तर-पूर्व और पाकिस्तान परस्त आतंकी संगठनों से उनके संपर्को के खुलासे लगातार हो रहे हैं। खुफिया एजेंसियों व सुरक्षा बलों की मानें तो अभी नक्सलियों के आधुनिक हथियारों से सुसज्जित और खतरनाक कमांडो तो पूरी तरह से सामने आए ही नहीं हैं।

खुफिया सूत्रों के मुताबिक, लश्कर-ए-तैयबा, हिजबुल मुजाहिदीन और लिट्टे से लेकर पूर्वोत्तर के उल्फा तक नक्सलियों को हथियार व गोला-बारूद की आपूर्ति करता रहा है। इनमें भी नक्सली सबसे ज्यादा प्रभावित श्रीलंका के चीतों यानी लिट्टे से रहे हैं। केरल के जंगलों में लिट्टे के लड़ाकों ने नक्सलियों को कमांडों प्रशिक्षण दिया, ऐसी सूचनाएं भी आईबी. को मिली थीं। इसीलिए, जब लिट्टे के चीतों को श्रीलंका की सेना ने आक्रामक अभियान चलाकर साफ कर दिया तो नक्सलियों ने अपने कमांडरों और काडर को सतर्क कर दिया कि लिट्टे जैसी गलती न दोहराएं। वास्तव में श्रीलंका में लिट्टे के सफाये और देश में संप्रग सरकार की वापसी के बाद सीपीआई (माओवादी) के पोलित ब्यूरो ने इसी साल 12 जून को बैठक की। इसमें उन्होंने अपनी आगामी रणनीति का एक लंबा चौड़ा दस्तावेज तैयार किया।

इन दस्तावेजों में नक्सलियों की मोबाइल वारफेयर रणनीति और दूसरे आतंकी संगठनों के साथ संबंधों का जिक्र है। माओवादियों ने अन्य संगठनों से भी अपील की है कि वे जम्मू-कश्मीर से लेकर पूर्वोत्तर में जगह-जगह वारदातों को अंजाम दें ताकि सरकार एक जगह फोकस न कर सके। उन्होंने चेताया भी है कि अगर एक साथ मिलकर न लड़े तो एक-एक करके सरकार सबको ठिकाने लगाने का प्रयास करेगी।

नक्सलियों ने दूसरे आतंकी संगठनों को चेताया था कि सरकार गुरिल्ला युद्ध में कोबरा जैसे बल बना रही है, जिसमें अभी 5 साल का समय लगेगा। उससे पहले जरूरी है कि अलग-अलग जगहों पर हम दुश्मनों के सामने इतने मोर्चे खोल दें कि उनके लिए सुरक्षा बलों को एक जगह रखना मुश्किल हो जाए। इस रणनीति के तहत नक्सलियों ने तो जगह-जगह मोर्चे खोल दिए हैं। हालांकि, अभी उन्होंने आधुनिक हथियारों से लैस अपने 6 हजार कमांडों की ताकत को बचाकर रखा है।

राजकिशोर - नई दिल्ली

क्या अजित वडनेरकर भारत के सबसे पहले ऑनलाईन पत्रकार हैं?

आज प्रात:काल अ-ब्लागर अजित बडनेरकर की ओजस्वी चिठ्ठापोस्ट पढ़ी जिसे ब्लागर के एडिट आप्शन में जाकर लिखा गया था। कमाल की वक्तता थी। इसमें निम्न जानकारियां प्राप्त हुई

: अजित वडनेरकर 89 से ऑनलाईन पत्रकार-कर्म कर रहे हैं। आदि चिठ्ठाकार कौन है इस पर तो लगभग सहमति है। आदि आनलाइन पत्रकर कौन है, आज इस पर अजित वडनेरकर ने अपना दावा ठोक दिया है?


: चिठ्ठाकारों में उत्सुकता थी की ब्लागर को निमंत्रित करने का क्या पैमाना था, रहस्य पता चला कि इसके लिये सकारात्मक सोच होना आवश्यक था।


जो नकारात्मक सोच रखते हैं वह व्यर्थ में क्यों कुलबुला रहे हैं?

Tuesday, October 27, 2009

ट्रेन को हाईजैक करने वाले इन अपहर्ताओं के साथ क्या करना चाहिये?

आज दोपहर राजधानी एक्सप्रेस अपहर्ताओं द्वारा हाईजैक करली गई, ये अपहर्ता जेल में बंद अपने साथी की रिहाई चाहते हैं,

क्या करना चाहिये इन अपहर्ताओं के साथ?

Friday, October 23, 2009

'मेरी बेटी का कत्ल हुआ, जज Cyriac Joseph पर केस चलाने दो'

सिस्टर अभया के पिता ने राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल और चीफ जस्टिस को चिट्ठी लिखकर सुप्रीम कोर्ट के एक जज Cyriac Joseph के खिलाफ जांच की मांग की है। सिस्टर अभया 17 साल पहले कोट्टायम के एक कॉन्वेंट में मृत पाई गई थीं। उनके पिता का आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट के सिरियाक जोसफ (Cyriac Joseph) ने इस केस को प्रभावित करने की कोशिश की है।

अभया के पिता ए. थॉमस ने अपने खत में लिखा है कि या तो जोसफ (Cyriac Joseph) के खिलाफ जांच की जाए या मुझे जज पर आईपीसी की धाराओं का उल्लंघन करने का केस चलाने की मंजूरी दी जाए। यह जानकारी उनके वकील ए. एक्स. वर्गीज ने दी। वर्गीज ने बताया कि मई 2008 में जोसफ (Cyriac Joseph) बेंगलुरु की उस लैब में गए थे जहां अभया मर्डर केस के तीन आरोपियों का नारको टेस्ट कराया जा रहा था। इस समय मामला अदालत में था और सीबीआई केस की जांच कर रही थी। इसके अलावा मर्डर के अगले दिन भी जोसफ (Cyriac Joseph) कॉन्वेंट गए थे उस समय वह अडिशनल एडवोकेट जनरल थे। वर्गीज के मुताबिक, इससे पता चलता है कि जज जोसफ (Cyriac Joseph) इसे दबाने की साजिश में शामिल हैं। इसकी जांच होनी चाहिए।

गौरतलब है कि सिस्टर अभया का शव 27 मार्च 1992 को कोट्टायम कॉन्वेंट में एक कुएं के भीतर पाया गया था। सीबीआई ने इस सिलसिले में 19 नवंबर 2008 को तीन लोगों को अरेस्ट किया था। हालांकि बाद में इन्हें 1 जनवरी को बेल मिल गई थी। सीबीआई ने केरल हाई कोर्ट को बताया कि जोसफ ने नारको टेस्ट की सीडी की जांच की थी और उसे सही बताया था। दूसरी तरफ, अभया के पिता का कहना है कि यह सीडी ऑरिजनल नहीं है।

Thursday, October 15, 2009

भारत ने फिर चीन को फटकारा, बांध न बनाने को कहा

भारत ने चीन के खिलाफ एक और मोर्चा खोलते हुए कहा कि वह चीन द्वारा ब्रह्मपुत्र नदी पर बड़े बांध के निर्माण के खिलाफ है और इस खबर की जांच कर रहा है कि इंकार किये जाने के बावजूद क्या चीन इस चोरी चुपके से इस परियोजना पर कार्य कर रहा है।

चीन की ओर से नदी पर बांध का निर्माण शुरू किए जाने की मीडिया में आई खबरों पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि पिछले तीन साल में बैठकों के दौरान भारत ने ऐसी परियोजनाओं से नीचे की ओर बहाव में रहने वाले लोगों के सामाजिक-आर्थिक जीवन पर व्यापक प्रभाव पड़ने की बात कही गई।

साल 2006 के बाद से इस मुद्दे पर विशेषज्ञ स्तर की तीन बैठकों में उल्लेख की बात करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विष्णु प्रकाश ने कहा भारतीय पक्ष ने चीनी पक्ष की ओर से ब्रह्मपुत्र नदी का रुख मोड़ने की परियोजना या बड़ा बांध बनाने की खबरों से जुड़ा मुद्दा उठाया है। भारतीय पक्ष ने चीन की ओर से ऐसी कोई गतिविधि न शुरू किए जाने की उम्मीद जताई जिससे नदी जल के रूख में परिवर्तन होता हो और नीचे की ओर बहाव के क्षेत्र में आर्थिक-सामाजिक जीवन प्रभावित हो।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ने इससे पहले भी ऐसे किसी बांध के निर्माण पर आपत्ति जताई थी और चीन ने ऐसी किसी योजना के बारे में सिरे से इंकार किया था।

उनकी यह टिप्पणी मीडिया में आई उन खबरों के बाद आई है कि चीन ने नागमू पनबिजली परियोजना के हिस्से के तौर पर नदी पर बांध बनाने का काम शुरू कर दिया है। नागमू पनबिजली परियोजना की शुरुआत 16 मार्च को हुई थी।